केंद्र सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का आधिकारिक नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। इसी के साथ देशभर में मौजूद सभी राज्य भवनों का नाम भी बदलकर ‘लोक भवन’ करने का निर्णय लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम लोकसेवा आधारित शासन व्यवस्था को और अधिक स्पष्ट करने की दिशा में उठाया गया है।
क्या है बदलाव का उद्देश्य?
सरकार के अनुसार, इन नाम परिवर्तनों का मुख्य उद्देश्य यह संदेश देना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के सभी प्रमुख कार्यालय जनता की सेवा के लिए हैं।
- ‘सेवा तीर्थ’ नाम यह संकेत देता है कि प्रधानमंत्री का कार्यालय केवल प्रशासनिक नियंत्रण का केंद्र नहीं, बल्कि जनसेवा का पवित्र स्थल है।
- वहीं ‘लोक भवन’ का अर्थ है कि राज्य भवन जनता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रभाव
नाम परिवर्तन के बाद सभी आधिकारिक दस्तावेज़ों, बोर्ड, साइनज, सरकारी वेबसाइटों और पत्राचार में नई पहचान का उपयोग किया जाएगा।
केंद्र के स्तर पर PMO से जुड़े विभागों में यह बदलाव चरणबद्ध रूप से लागू होगा। राज्य सरकारों को भी अपने-अपने राज्य भवनों के नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस निर्णय पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
- कुछ नेताओं ने इसे भारतीय सोच और सेवा-आधारित प्रशासन का प्रतीक बताया है।
- वहीं विरोधी दलों ने इसे एक अनावश्यक कदम बताते हुए कहा कि इससे सरकारी खर्च बढ़ेगा और जनहित से जुड़े मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकेगा।