दिवाली (Diwali) की रोशनी के बाद आता भाई-बहन का त्यौहार भाई दूज (Bhaiduj)। भाई दूज का त्यौहार दिवाली के तीसरे दिन मनाया जाता है। यह त्यौहार प्रतिक होता है भाई-बहन के प्रेम का, स्नेह और विश्वास का। यह त्योहार किसी एक स्थान नहीं बल्कि पूरे भारत में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। कोई इसे भाउ दूज के नाम से बोलता है कोई भैयादूज के नाम से जानता है लेकिन इस के पीछे छिपे भाव हर जगह एक ही होते हैं वो भाव है भाई-बहन का अटूट रिश्ता।
भाई दूज का त्योहार (Diwali Festival) केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं है , बल्कि इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी जुड़ी है। मान्यता यह है कि मृत्यु के देवता यमराज की बहन यमुना अपने भाई से बहुत स्नेह किया करती थीं। एक दिन उन्होंने अपने भाई यमराज को अपने घर पर आमंत्रित किया और स्नेहपूर्वक भोजन कराया। यमराज अपनी बहन के इस प्रेम को देखकर इतने प्रसन्न हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा कि जो भी भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे यमलोक का भय नहीं रहेगा। तभी से यह पर्व मनाने की परंपरा आरंभ हुई, जो आज भी पूरे देश में श्रद्धा और प्रेम के साथ निभाई जाती है।
भाई दूज का यह त्यौहार हमारे सामाजिक के साथ हमारे पारवारिक जीवन को भी मजबूत करता है। साथ ही हमें यह संदेश देता है कि रिश्तों में स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति सम्मान ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।